गोरखपुर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर बुजुर्ग दंपत्ति से 5 लाख की ठगी, साइबर जालसाजों ने बनाया शिकार

Cyber criminals cheated retired scientist of crores by posing as fake court and judge

गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां साइबर जालसाजों ने खुद को NIA और ATS का अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग दंपत्ति को दो दिन तक तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और डर का माहौल बनाकर उनसे 5 लाख रुपये की ठगी कर ली। मामले का खुलासा तब हुआ, जब जालसाजों के सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए और पीड़ित परिवार को एहसास हुआ कि उनके साथ बड़ा धोखा हो चुका है। अब पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, बेलघाट थाना क्षेत्र के चेतरा तिवारी गांव निवासी शैलेंद्र कुमार तिवारी ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 17 फरवरी 2026 को उनके पिता धनुषधारी तिवारी के मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को एक केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में एक बैंक खाता खोलने के लिए किया गया है।

जालसाज ने दावा किया कि एक आतंकवादी की गिरफ्तारी के दौरान इस बैंक खाते का खुलासा हुआ है और उसी खाते के जरिए संदिग्ध लेनदेन किए गए हैं। यह सुनकर बुजुर्ग दंपत्ति घबरा गए। कॉल करने वाले ने उनसे कहा कि उन्हें तुरंत पुणे स्थित NIA कार्यालय पहुंचना होगा। जब उन्होंने इतनी जल्दी वहां पहुंचने में असमर्थता जताई, तो जालसाज ने कहा कि उनके वरिष्ठ अधिकारी उनसे संपर्क करेंगे और आगे की प्रक्रिया बताएंगे।

कुछ ही देर बाद दूसरे नंबर से WhatsApp कॉल आई। वीडियो कॉल पर खुद को वरिष्ठ जांच अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने कहा कि उनके सभी दस्तावेजों की जांच होगी और जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” में रहना होगा। जालसाजों ने उन्हें किसी से बातचीत न करने और लगातार संपर्क में बने रहने के निर्देश दिए। इससे बुजुर्ग दंपत्ति पूरी तरह मानसिक दबाव में आ गए।

इसी दौरान एक व्यक्ति ने उनसे कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी करने के लिए पांच लाख रुपये जमा कराने होंगे। उसने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी और इसके बदले आधिकारिक रसीद भी दी जाएगी। सरकारी कार्रवाई के डर और लगातार मिल रही धमकियों के कारण बुजुर्ग दंपत्ति ने उनकी बातों पर विश्वास कर लिया।

18 फरवरी को धनुषधारी तिवारी अपनी सावधि जमा (FD) तुड़वाने के लिए SBI की बांसगांव शाखा पहुंचे। अगले दिन उन्होंने जालसाजों द्वारा बताए गए बैंक खाते में पूरे पांच लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। रकम मिलने के बाद ठगों ने WhatsApp पर RBI की कथित रसीद और भारत सरकार की मुहर लगे कुछ दस्तावेज भेजे, ताकि उन्हें लगे कि पूरी प्रक्रिया वैध है और उनके पैसे सुरक्षित हैं।

लेकिन अगले ही दिन जब बुजुर्ग दंपत्ति ने उन नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, तो सभी मोबाइल नंबर बंद मिले। तब उन्हें समझ आया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे को पूरी घटना बताई। परिवार ने तुरंत साइबर क्राइम थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस अधीक्षक (क्राइम) सुधीर जायसवाल ने बताया कि मामले में FIR दर्ज कर ली गई है और साइबर टीम बैंक खातों, मोबाइल नंबरों तथा डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना एक बार फिर बताती है कि “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर होने वाली साइबर ठगी तेजी से बढ़ रही है। पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन, वीडियो कॉल या WhatsApp के जरिए किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही जांच के नाम पर किसी खाते में पैसे ट्रांसफर कराने के निर्देश देती है। ऐसे किसी भी कॉल पर घबराने के बजाय तुरंत कॉल काटें, संबंधित एजेंसी से सत्यापन करें और साइबर हेल्पलाइन 1930 या NCRP पोर्टल पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया NPR BHARAT NEWS के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...

Related posts